पेपर का दिन वो दिन होता है जिसका इंतज़ार हम जैसे लोग पूरे साल करते हैंl आखिर यही वो दिन होता है जिस दिन हमें अपनी प्रतिभा को दिखने का मौका मिलता हैl सारे साल गधों से भी ज्यादा मेहनत करके जो दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हमने की है उसे अब दिखने का वक्त आ गया हैl आज जो कुछ भी हो जाये कोई भी हमें रोक नहीं सकता हैl आज हम बिल्कुल तत्पर रहते हैं की किस तरह सारी दुनिया को यह बताया जाये की हम से ज्यादा ज्ञान दुनिया में किसी और के पास हो ही नहीं सकता हैl
Examination hall में पहुँचे, दिल ज़ोरों से धड़क रहा होता हैl पता नहीं क्या होगा और बार-बार यही दुआ मांगी जाती है की भनवान पेपर में बस वही सवाल डालना जिसका हमें जवाब मालूम होl पेपर हाथ में और उसे देखते ही कलेजा एकदम मुहँ को आ जाता हैl पहला ही सवाल जो की करना अनिवार्य है आता ही नहीं हैl किसी तरह हिम्मत करके दूसरे सवालों पर नज़र डाली तब कहीं जाकर दिमाग ठीक हुआl अगर पहला ही सवाल ना आता हो तो हर सवाल का जवाब लिखते हुए दिमाग में यही रहता है की इसका क्या करेंगेl इसका तो अचार भी नहीं डाल सकते हैं जो की हर माँ का नुक्सा होता हैl किसी तरह बाकि के सवाल पूरे किये जाते हैंl
और फिर पहला सवालl जब कुछ पता ही नहीं है तो उसके बारे में लिखेगें क्याl या तो उसे छोड़ दो, लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि जब भी कोई आपकी तैयारी करवाता है तो सबसे पहली सलाह वह आपको यही देता है की जो भी हो अगर पास होना है तो पेपर में कोई भी सवाल छोड़कर मत आना वर्ना पास होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैl लेकिन जब कुछ आता नहीं तो क्या करे? एक नज़र ऊपर उठा कर देखा जाता हैl दायें-बायें सभी के हाथ जेट की गति से चल रहे होते हैंl उन्हें देखकर लगता है इसको तो सब कुछ आता है, पता नहीं क्या-क्या लिख रहा होगा, मैंने तो सिर्फ दो पेज लिखकर छोड़ दिए, और ज्यादा लिखना चाहिए थाl लेकिन उन्हें देखकर शरीर में एक नहीं उर्जा जागृत होती हैl कुछ भी हो जाय आज कोई भी सवाल मेरे हाथों से नहीं बचेगाl
और फिर सच में शुरू होता है उस दिव्य ज्ञान का इस्तेमाल जिसकी हम चर्चा कर रहे थेl इस दिव्य ज्ञान का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे सवालों को लिखने में ही हो सकता है जिसका जवाब कोई नहीं जनता हो क्योंकि तभी तो examiner को पता चलेगा की किस विद्यार्थी को इतने सालों की तैयारी के बाद सबसे ज्यादा दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई हैl कौन सबसे ज्यादा अपने दिव्य ज्ञान की रोशनी से दूसरों को Enlighten कर सकता हैl अगर आपकी Enlightenment पेपर को चेक करने वाले पर पड़ गयी तो आपकी नैया पार निकल जाएगीl आपको उतने नंबर मिल सकते है जो आपको पास कर देl लेकिन अगर उसकी सोच आपकी सोच से अलग निकली तो फिर आपका कुछ नहीं हो सकताl फिर तो आपके Enlightenment की बत्ती वह कैसे बुझाएगा इसका पता आपको रिजल्ट आने पर अपने उस पेपर के नंबर देख कर लग जायेगाl फिर आपको अफ़सोस होता है की आज-कल तो जमाना ही नहीं रहा है किसी को भी अपना दिव्य ज्ञान देने काl
पहला पेपर हो गयाl अब थी दूसरे की बारीl सामान्य ज्ञान का था यानि GK.
सामान्य ज्ञान को सामान्य समझने की भूल बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह उतना सामान्य होता नहीं है जैसा की यह नाम लगता हैl यह किसी भी सामान्य व्यक्ति को आसामान्य बनाने का पूरा सामर्थ्य रखता हैl यह किसी का मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता हैl और मेरा मानसिक संतुलन कैसे बिगड़ा उसकी एक मिसाल दे रही हूँl
पहला सवाल- अकबरनामा किसने लिखा था?
मैं अब भी ऐसे सवाल पढ़ती हूँ तो मन में पहला ख्याल आता है- मुझे क्या पता किसने लिखा थाl और मुझे जानकार भी करना क्या हैl अकबर मर गया, अकबरनामा लिखने वाला मर गया, और छोड़ गया हमारे लिए अकबरनामाl आज तक उसकी एक लाइन तो पड़ी नहीं है लेकिन उसे किसने लिखा था यह ज़रूर पता होना चाहिएl ऐसी ही और ना जाने कितनी ही क़िताबें होगीं जिनकी शक्ल आज तक देखी नहीं लेकिन रट्टा मार-मारकर यह ज़रूर याद किया की उसे किसने लिखा थाl लेकिन फिर अंतरात्मा जाग उठती है जो धिकारती है- ये होती हो पेपर की तैयारी, सारा साल यही किया था, शर्म करो अपने आप परl
खैर, ऐसा नहीं था की मुझे सवाल का जवाब नहीं पता थाl नाम उसका था अबुल फज़ल लेकिन असली परेशानी यह थी की उसकी असली spelling क्या थीl
क्या यह Abul fazal था या Abul fazl या Abul fazala, दिमाग कुछ काम नहीं कर रहा थाl अगर यह चार आप्शन वाला पेपर होता तो झट से जवाब पता चल जाता लेकिन यहाँ तो सही नाम लिखना पड़ेगा वर्ना जीरो मिलेगाl
आप्शन वाला पेपर नहीं तो क्या हुआ हम इसे आप्शन वाला बना देते हैंl तो मैंने ऐसी हिम्मत दिखाई जिसके बारे में सोचकर किसी भी विद्यार्थी की रूह कांप उठेगीl मैंने लिखा-
प्रिय Examiner,
(वैसे Examiner कभी प्रिय हो ही नहीं सकता हैl उसने आज तक ऐसा क्या किया है जो उसे किसी विद्यार्थी का प्रिय बनायेl क्या उसने पेपर आसन बनाया? नहींl क्या उसने हमें अच्छे नंबर दिए? नहींl तो फिर उसके सवाल का जवाब खुद उसे ही देने दोl)
नीचे आपको चार विकल्प दिए जा रहे हैंl कृपया करके उसमें से सही जवाब चुन लें:-
अकबरनामा लिखा था
a) Abul fazal
b) Abul fazl
c) Abul fazala
d) None of the above
वैसे बिचारे अबुल फज़ल ने सपने में भी नहीं सोचा होगा की इतनी सदियों के बाद उसके नाम की कोई इस तरह फज़ीहत करेगाl भगवान् उसकी आत्मा को शांति देl