मैंने कहा उससे की मुझे प्यार है तुझसे/
उसने पूछा घर में अकेली कब रहती हो/
मैंने कहा क्यों क्या करना है?
उसने कहा तुमसे मिलना है/
मैंने कहा मिलना है तो सबके सामने भी मिल सकते हैं/
उसने कहा उसमे वह मज़ा नहीं आयेगा जो अकेले मिलने में है/
मैंने कहा कही बाहर मिल लेते हैं जहाँ हमें कोई परेशान ना करे/
उसने कहा वहाँ भी मज़ा नहीं आयेगा/
तो मैंने पूछा अकेले मिल कर क्या करोगे?
वो बोला प्यार करेंगे/
मैंने पूछा “प्यार” का मतलब?
उसने कहा वही जो तुमने अभी कहा की तुम्हें मुझ से प्यार है/ बस वही करेंगे/
मैं उसका मतलब समझ चुकी थी/
मैंने पूछा क्या प्यार का यही मतलब होता है?
उसने कहा आजकल तो प्यार का यही मतलब होता है/
मैंने कहा लेकिन एक दूसरे को जानने की जरुरत भी तो होती है/ पहले थोड़ी बात करते हैं/
उसने कहा बात करके वक्त जाया करने की क्या जरुरत है, फ़ौरन प्यार शुरू कर देना चाहिये/
मैंने कहा अगर मैं ऐसा ना करूँ तो?
उसने तपाक से कहा उसे प्यार करने वाले और मिल जायेंगे/ आजकल दुनिया में ऐसे प्यार करने वालों की कोई कमी नहीं है/
मैंने कहा ठीक है कोई और ढूंढ लो, तो उसने झट से फोन काट दिया/
और मैं दूसरी तरफ फोन हाथ में लिए बस यही सोच रही थी
की अगर यही प्यार है तो —
हम खाक ही दम भरते थे उनसे मोहब्बत करने का,
सच तो ये है की हमने कभी उनसे “प्यार” किया ही नहीं/
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