Thursday, 11 June 2015

सरकारी नौकरी की तैयारी- हानियाँ और लाभ-1


मैं २९ साल की हूँ और आने वाले कुछ महीनों में तीस की हो जाऊँगी| ना तो मेरी शादी हुई है और ना ही मेरे पास कोई नौकरी है| इतनी उम्र हो जाने पर भी मैं बेरोजगार हूँ| और आज-कल मेरे पास करने को कोई काम नहीं है| मैं बस सारा दिन कंप्यूटर पर बैठे-बैठे न जाने क्या करती रहती हूँ मुझे खुद भी नहीं मालूम है| आप ज़रूर जानना चाहेंगे की मेरी ऐसी हालत कैसे हुई| तो बता दूँ की इस सब की जिम्मेदार मैं खुद ही हूँ| मैंने एक बहुत ही बहादुरी का क़दम उठाया था- सरकारी नौकरी की तैयारी करने का| और आज जो भी मेरी हालत है वो इसी बहादुरी भरे क़दम की वजह से ही है|

तो छह साल पहले की बात है जब अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन ख़त्म होने पर मैंने सोचा मैं इतनी इंटेलीजेंट हूँ, सबसे ज्यादा नंबर लाती हूँ| इतने टुच्चे- टुच्चे लोग सरकारी नौकरी का पेपर पास कर लेते हैं तो मैं क्यों न अपनी किस्मत आज़माकर देखूँ| और भई उसी दिन से बस ना जाने मेरे सिर पर कौन-भूत सवार हुआ मैं इस के पीछे सब कुछ भूल गयी| (आज मुझे पता लग रहा है की वे लोग टुच्चे नहीं हैं बल्कि मैं टुच्ची हूँ|)

सबसे पहला काम था एक अच्छे से कोचिंग की तलाश करना जो बड़ी ही आसानी से मिल गया|( उन लोगों की advertisement किस दिन काम आनी थी)| और बड़ी ही सफ़ाई से उन्होंने मुझे इस बात के लिए तैयार कर लिया की मैं 2 लाख रूपये का कोर्स कर लूँ| तो शुरुआत में ही मेरी बुधि भ्रष्ट हो चुकी थी| (और मैं अपने आप को इंटेलीजेंट समझ रही थी|)

फिर क्या था शुरू हो गया क्लास पे क्लास लेने का दौर| दिन भर किताबों को चाटने का दौर| दिन भर कमरे में रहने का दौर| घरवालों को भी यकीन हो चला था की यह तो पेपर पास कर के ही रहेगी| अब इसे कोई नहीं रोक सकता|

लेकिन आज छह सालों में मेरी हालत उस धोबी के कुत्ते जैसी हो गयी है जो ना घर का रहा ना घाट का|

सबसे बड़ी चीज़ जो आपको सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए मिलाती है वह है- बेरोजगारी| इतनी उम्र हो जाने पर भी आप हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए अपने घरवालों पर आश्रित हो जाते हैं| आप सोचते हैं कोई बात नहीं आज नहीं तो कल नौकरी मिल ही जाएगी| लेकिन सालों की तैयारी के बाद भी आपका कुछ नहीं होता| आप जहाँ से चले थे वहाँ से एक क़दम भी आगे बढ़ा नहीं पाए हैं| बल्कि आप जहाँ पर खड़े थे आज कई सालों बाद भी वही पर खड़े हैं|

मेरे साथी जो कभी मेरे साथ स्कूल या कॉलेज में पड़ा करते थे या तो उनकी शादी ही चुकी और वे एक या दो बच्चे पैदा करके अपनी जिंदगी सुकून से जी रहे है| या फिर वे नौकरी करके और अपनी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के साथ अपनी जिंदगी और भी ज्यादा सुकून से जी रहे हैं| और मैं जो कभी क्लास की सबसे होशियार लड़की हुआ करती थी बेरोजगार हूँ| बल्कि वो लोग भी जो कभी भी एक बार में सारे पेपर पास नहीं कर पाते थे और अगले साल फिर से पेपर देते थे आज नौकरी कर रहे हैं| बता नहीं सकती की घर से निकलते हुए और इन लोगों के सामने जाते हुए मुझे कितनी शर्म आती है|

तो मैंने सोचा कोई नौकरी ही देख ली जाय| घर पर बैठे-बैठे कुछ नहीं होगा| तो मैंने अपना अच्छा सा resume तैयार किया और दो-चार नहीं बल्कि बीस-पच्चीस जगह भेज दिया|(या तो नौकरी या फिर.................नहीं suicide नहीं suicide करनी होती तो मैं यह सब नहीं लिख रही होती|)

हफ्ते भर के इंतजार के बाद एक फोन आया| सामने से बोल रही एक लड़की ने मुझे बड़े ही प्यार से समझाया की मैं उनकी जॉब के लिए overqualified हूँ| मैंने कहा की मेरी शैक्षिक योग्यता उनके अनुसार ही है और मैंने आज तक कहीं पर नौकरी भी नहीं की है तो मैं overqualified कैसे हो सकती हूँ| लेकिन उसने सॉरी कहकर फ़ोन काट दिया| मैं काफी देर तक यही सोचती रही की मैं overqualified कैसे हो गयी| क्या कोई ऐसा कोर्स है जो मैंने किया हो और जिसका मुझे पता ही ना हो| मेरी होशियारी यहाँ पर बिल्कुल भी काम नहीं आई| कुछ देर बाद मैंने अपना resume उठाकर देखा तो तो मुझे समझ आया| मैं overqualified पढाई में नहीं थी| ना, ना बिल्कुल भी नहीं ऐसा मेरी जानकारी के बिना हो ही नहीं सकता था| लेकिन मैं overqualified तो थी पढाई में नहीं बल्कि अपनी उम्र में| शायद उस लड़की को मुझे सच बताने में हिचकिचाहट हो रही थी| मैंने उस नौकरी के लिए आवेदन भेजा था जिसके लिए २३-२४ साल के नौजवान आवेदन भेजते हैं और मैं, मैं तो तीस साल की होने वाली हूँ| तो हुई न मैं overqualfied|

फिर मैंने आवेदन को बदला और उस नौकरी के लिए आवेदन किया जिसके लिए मेरी उम्र के नौजवान आवेदन भेजते हैं| और फोन आया, मेरी उम्मीदों के विरुद्ध उनका फोन आया| सामने वाले युवक ने कहा की वे मुझे नौकरी देने के लिए तैयार हैं लेकिन मुझे जिस field में नौकरी दी जानी है मुझे उस में बिल्कुल भी अनुभव नहीं है| और उसने भी सौरी कह कर फोन काट दिया|

अनुभव नहीं है- भई मैं जो पिछले छह सालों से तैयारी कर रही थी क्या वह किसी अनुभव में नहीं आता है| उस सब की कोई कीमत नहीं है| ‘नहीं उन सब की कोई कीमत नहीं है| तैयारी ही तो कर रही थी कोई ‘सरकारी नौकरी की तैयारी’ में डिग्री या डिप्लोमा तो नहीं कर रही थी|’ सच ही है तैयारी करने के लिए आप को कोई भी डिग्री नहीं देता है फिर चाहे आपने पूरी की पूरी लाइब्रेरी ही क्यों ना पढ़ डाली हो| ये अनुभव जो मैंने किया तैयारी करते हुए बेकार का अनुभव है और किसी को भी इस अनुभव की कोई ज़रूरत नहीं है- खास तौर पर सरकारी नौकरी को क्योंकि तभी तो मुझे बार-बार बेकार वस्तु की तरह बाहर का दरवाज़ा दिखा जाता था|

मेरे मन में हज़ार-हज़ार गालियाँ उभर आयी थी| मन सब को कोस रहा था| और उस दिन को सबसे ज्यादा जिस दिन मैंने फैसला किया था सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए|


6 comments:

  1. Maine kshitija,kshirika suna par kbi kshirija nhi suna .aapka naam bhut Alag hai ,iska kya matlab hota hai ?

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    1. अगर सच बताऊ तो मुझे भी अपने नाम का मतलब नहीं पता है| हर कोई मुझ से यही सवाल करता है| और मुझे समझ नहीं आता की मैं क्या जवाब दूँ| मेरी पड़ दादा ने मुझे यह नाम दिया था जो मेरे पैदा होने के कुछ दिन बाद ही गुजर गये थे| तो अब कोई नहीं है मतलब बताने वाला| tragedy of my life.

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    2. क्षीर सागर में भगवन विष्णु शयन करते हैं, जिसे दूग्ध का सागर भी कहते हैं, मुझे लगता हैं आप के पड़दादाजी ने इसी से प्रेरित होकर आपका नाम रखा होगा.

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  2. Aapne Bahut achha likha hai ,agar ye aapki duniya ka sach hai to niras na ho.aap jarur tarrki karengi .likhte rahiye

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    1. thnx a lot...........मैं अब उस दौर से बाहर निकल आई हूँ|

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