अभय के चले जाने के बाद कई रातें सुजाता ने जागते हुए बिताईं| आफिस में भी उसका मन नहीं लगता था| वह बस एक बार अभय को देख लेना चाहती थी| वह फोन अपने हाथ में लेती, उसका नंबर भी निकाल लेती लेकिन उसे फोन करने की हिम्मत वह नहीं जुटा पाती थी| उसे पता था की अभय से बात करके वह और ज़्यादा कमज़ोर पड़ जायेगी| उसे पता था की उसे अकेले ही इस तकलीफ़ को सहन करना पड़ेगा|
इसलिए अभय के चले जाने के बाद उसने कभी खुद से अभय को फोन नहीं किया| उसे ऐसा करना ही ठीक लगा क्योंकि अभय से जितना दूर वह रहेगी उतना ही उसके लिये अच्छा होगा| शुरू-शुरू में तो अभय रोज़ सुजाता से फोन पर बात कर लिया करता था लेकिन वक्त के साथ धीरे-धीरे उनकी बातचीत कम होने लगी थी| इसी बीच एक दिन अभय ने उसे मिलने के लिये बुलाया लेकिन सुजाता ने बहाना बनाकर अभय से मिलने से ही मनाकर दिया| उसे पता था की अभय वो मंजिल थी जिसे वह कभी भी नहीं पा सकती थी|
और आज भी उसने यही किया| आज अभय का जन्मदिन था और वह बार-बार उसे फोन कर रहा था लेकिन बहुत चाहने पर भी सुजाता ने उससे बात नहीं की| वह बस एक बार उसकी आवाज़ सुन लेना चाहती थी लेकिन इससे उसका दर्द और बढ़ जायेगा उसे ये भी पता था|
अभय को भी शायद यह महसूस होने लगा था की सुजाता उससे बात नहीं करना चाहती थी लेकिन उसने उससे इस बारे में कभी कुछ नहीं पूछा| और फिर धीरे-धीरे उन लोगों की बातचीत होनी कम होने लगी| और एक वक्त ऐसा आया जब उन लोगों ने कई महीनों तक बात नहीं की|
इस तरह एक साल और बीत गया| तभी एक दिन अचानक अभय उसे एक स्टोर में खरीददारी करते हुए मिल गया| अगर उसने उसे देखा नहीं होता तो वह चुपचाप वहाँ से निकल गयी होती| लेकिन उसे देखते ही अभय फ़ौरन उसके पास आया और उसके मना करने के बावजूद उसे एक कॉफ़ी शॉप में ले गया| वह जानना चाहता था की आखिर उसे हुआ क्या था और उसने उससे बातचीत करना बंद क्यों कर दिया था|
सुजाता काफी देर तक खामोश बैठी रही लेकिन वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी जो उड़े धोखा देते हुए उसकी आँखों से बह निकले थे| वह नहीं चाहती थी की ऐसा कुछ भी अभय के सामने हो| लेकिन वह अपने आप को रोक नहीं पायी| काफी देर रोने के बाद उसके आंसू थमे| अभय शांत बैठा उसे देख रहा था| वह चाहता था की जो कुछ भी उसके दिल में था वह बाहर निकल आये|
सुजाता सोच रही थी उसे कहना चाहिए या नहीं| उसके साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था| उसे नहीं पता था की उसकी बात सुनकर अभय की क्या प्रतिक्रिया होगी| क्या वह उसे खो तो नहीं देगी|
‘तो अब बताओ क्या हुआ|’
‘नहीं कुछ नहीं|’
‘नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता| बहुत कुछ हुआ है और मैं बिना सुने आज यहाँ से नहीं जाने वाला हूँ|
सुजाता चाहती थी की अपना दिल खोलकर अभय के सामने रख दे, उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था| उसने कभी किसी से इस तरह की बात नहीं की थी|
‘वो तुम मुझे अच्छे लगते हो,’ उसने धीरे से कहा|
अभय कुछ पलों के लिए तो खामोश रहा और फिर ज़ोर से हँस पड़ा|
‘बस इतनी सी बात| मुझे लगा ही था| तुम भी ना एकदम बेवकूफ़ हो| पहले क्यों नहीं बताया| और मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ|’
अभय को इस तरह हँसता हुआ देखकर सुजाता को हैरानी हो रही थी| तो क्या वह भी उसे पसंद करता है?
‘मुझे लगा कहीं तुम मुझ से गुस्सा न हो जाओ|’
‘तुम्हें लगता है की मैं इस बात पर तुमसे गुस्सा हो जाऊँगा|’
‘पता नहीं?’ सुजाता ने अपना सिर झुका लिया|
‘तुम अगर पहले बता देती तो हम इस बात का कोई ना कोई हल ख़ोज लेते| तुम्हें बेकार ही इतनी तकलीफ़ से नहीं गुजरना पड़ता|’
अभय की बात सुनकर सुजाता को थोड़ी राहत महसूस हुई| उसका दिल भी अब शांत हो गया था|
‘देखो तुम्हारे साथ शायद ऐसा पहली बार हुआ है इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है लेकिन जब कुछ वक्त बीत जायेगा तो तुम्हें इस बात पर हंसी आयेगी की तुमने कितनी बेवकूफी की| हमें कई बार ऐसे लोग मिलते हैं जिन्हें हम बहुत पसंद करने लगते हैं| हमें लगता है हम उनके बिना जी नहीं सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है| तुम देखना कुछ समय बाद तुम यह सब भूल जाओगी|’
‘लेकिन....|’
‘मुझे लगा था तुम बहुत अक्लमंद हो| लेकिन तुम भी उन बेवकूफ़ लड़कियों की तरह निकली|’
‘मतलब?’
‘अरे भई, यह प्यार-व्यार के चक्कर में पड़ना हम जैसे लोगों का काम होता है जिन्हें कुछ और नहीं आता है| और तुम्हें सच कहूँ यह प्यार –व्यार कुछ नहीं होता है बस कुछ देर का आकर्षण होता है| कभी यह जल्दी ख़त्म हो जाता है और कभी देर तक चलता है| लेकिन एक दिन ख़त्म ज़रूर होता है| अब मुझे ही देख लो मुझे पता नहीं आज तक कितनी लड़कियों से प्यार हुआ| लेकिन सब का एक ही अंजाम हुआ, ब्रेक-अप|’
‘लेकिन मैं सच में तुमसे तुमसे प्यार करती हूँ|’
‘हाँ, हाँ मुझे पता है| लेकिन तुम्हारे साथ ऐसा पहली बार हुआ हैं ना इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है| पता है तुम मुझे क्यों अच्छी लगती थी और मैं क्यों तुम्हारे साथ इतना वक्त बिताता था?’
‘क्यों?”
‘क्योंकि मुझे पता था की तुम उन बाकि सब लड़कियों की तरह मुझ से प्यार नहीं कर बैठोगी और मेरे पीछे नहीं पड़ी रहोगी की मैं तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड बना लूँ| मैं उन सब से इतना परेशान हो चुका था| मैं तुम्हें समझदार समझता था लेकिन तुम भी बाकियों की तरह ही निकली| देखो तुम्हें अपना अपना भविष्य के बारे में सोचना चाहिए ना की मेरे बारे में| तुम्हें और भी कई अच्छे लड़के मिल जायेंगे|’
सुजाता एकटक अभय की बातों को सुन रही थी| उसके आंसू अब रुक चुके थे और चेहरा कठोर होने लगा था| अभय को ऐसा क्यों लगा की वह उसके प्यार में नहीं पड़ेगी? क्योंकि वह उससे कम सुन्दर है इसलिए? या फिर जिन लड़कियों के पास दिमाग होता है उनके पास दिल नहीं होता? क्यों वह एक सुन्दर लड़के के प्यार में नहीं पड़ सकती? क्या वह प्यार करना नहीं जानती? क्या प्यार करने का हक़ सिर्फ अभय जैसे लड़कों और उन सुन्दर लड़कियों को होता है जिनके साथ वह घूमता है? क्या उसके पास दिल नहीं है? क्या उसकी कोई भावनाएँ नहीं? और क्या उसका दिल टूटना नहीं जानता? उसका दिल भी चाहता है की कोई उसे भी प्यार करने वाला हो, उसे बाँहों में भरने वाला हो, उसका ख्याल रखने वाला हो, उसे हंसाने वाला हो? क्या वह अभय को उन लड़कियों से कम प्यार करती क्योंकि वह खुबसूरत नहीं है और उनकी तरह बनठन कर नहीं रहती है? क्या प्यार करने के लिए सिर्फ सुन्दर चेहरे और शरीर की ही जरुरत होती है? क्या मन की भावनाओं का इससे कोई लेना देना नहीं है?
उसे समझ आ रहा था की अभय जैसा लड़का उसे कभी पसंद कर ही नहीं सकता है| शायद उसके साथ होने और उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनाने में उसे शर्मिंदगी महसूस होगी| उसे कोई अपने जैसी ही पसंद आयेगी जो उसके जितनी ही गोरी हो, और उस जितनी ही सुन्दर हो| और सिर्फ अभय ही नहीं बल्कि और लोग भी उसके जैसी लड़की को अभय के साथ देखकर पहला सवाल यही करेंगे - क्या इसे कोई और नहीं मिली? हमारे समाज में शादी के वक्त लड़की का सिर्फ एक गुण होता है और वह है उसकी सुन्दरता| अगर लड़की सुन्दर नहीं है तो उसके दुसरें गुणों का कोई मोल नहीं है|
और आज अभय को शायद और ज्यादा घमंड हो गया होगा की देखो सुजाता जैसी अक्लमंद लडकियाँ भी उसके पीछे दीवानी हुई फिरती है| अभय की बातों में उसका यह घमंड साफ झलक रहा था|
सुजाता चुपचाप उसे सुनती रही| और एक घंटे बाद वह वापिस घर लौट आयी| शायद अभय को वह जैसा समझ रही थी वह वैसा नहीं था| अगर वह साफ मना कर देता यह कहकर की उसे उससे प्यार नहीं है तो भी सुजाता को इतना बुरा नहीं लगता जितना उसे उसकी ऐसी बातें सुनकर लग रहा था| वह अभय को जितना संवेदनशील और अक्लमंद समझती थी आज उसे उसकी सोच उतनी ही असंवेदनशील और घटिया लग रही थी| उसे अपने दिल के टूट जाने का इतना दुःख नहीं था जितना दुःख उसे इस बात का हो रहा था की अभय के लिए उसकी भावनाओं का कोई मतलब नहीं है| एक दोस्त की खातिर ही सही वह वह उसका दर्द थोड़ा कम कर सकता था लेकिन उसे तो इस बात में आनंद आ रहा था की उसके पीछे भागने वाली लडकियों में सुजाता का भी नाम जुड़ गया था| और उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब उसे पता चला वह किस से शादी कर रहा था| उसने अभय के बारे में जैसा सोचा था वह वैसा ही निकला| यही उनकी आखिरी बातचीत भी थी|
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इसलिए अभय के चले जाने के बाद उसने कभी खुद से अभय को फोन नहीं किया| उसे ऐसा करना ही ठीक लगा क्योंकि अभय से जितना दूर वह रहेगी उतना ही उसके लिये अच्छा होगा| शुरू-शुरू में तो अभय रोज़ सुजाता से फोन पर बात कर लिया करता था लेकिन वक्त के साथ धीरे-धीरे उनकी बातचीत कम होने लगी थी| इसी बीच एक दिन अभय ने उसे मिलने के लिये बुलाया लेकिन सुजाता ने बहाना बनाकर अभय से मिलने से ही मनाकर दिया| उसे पता था की अभय वो मंजिल थी जिसे वह कभी भी नहीं पा सकती थी|
और आज भी उसने यही किया| आज अभय का जन्मदिन था और वह बार-बार उसे फोन कर रहा था लेकिन बहुत चाहने पर भी सुजाता ने उससे बात नहीं की| वह बस एक बार उसकी आवाज़ सुन लेना चाहती थी लेकिन इससे उसका दर्द और बढ़ जायेगा उसे ये भी पता था|
अभय को भी शायद यह महसूस होने लगा था की सुजाता उससे बात नहीं करना चाहती थी लेकिन उसने उससे इस बारे में कभी कुछ नहीं पूछा| और फिर धीरे-धीरे उन लोगों की बातचीत होनी कम होने लगी| और एक वक्त ऐसा आया जब उन लोगों ने कई महीनों तक बात नहीं की|
इस तरह एक साल और बीत गया| तभी एक दिन अचानक अभय उसे एक स्टोर में खरीददारी करते हुए मिल गया| अगर उसने उसे देखा नहीं होता तो वह चुपचाप वहाँ से निकल गयी होती| लेकिन उसे देखते ही अभय फ़ौरन उसके पास आया और उसके मना करने के बावजूद उसे एक कॉफ़ी शॉप में ले गया| वह जानना चाहता था की आखिर उसे हुआ क्या था और उसने उससे बातचीत करना बंद क्यों कर दिया था|
सुजाता काफी देर तक खामोश बैठी रही लेकिन वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी जो उड़े धोखा देते हुए उसकी आँखों से बह निकले थे| वह नहीं चाहती थी की ऐसा कुछ भी अभय के सामने हो| लेकिन वह अपने आप को रोक नहीं पायी| काफी देर रोने के बाद उसके आंसू थमे| अभय शांत बैठा उसे देख रहा था| वह चाहता था की जो कुछ भी उसके दिल में था वह बाहर निकल आये|
सुजाता सोच रही थी उसे कहना चाहिए या नहीं| उसके साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था| उसे नहीं पता था की उसकी बात सुनकर अभय की क्या प्रतिक्रिया होगी| क्या वह उसे खो तो नहीं देगी|
‘तो अब बताओ क्या हुआ|’
‘नहीं कुछ नहीं|’
‘नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता| बहुत कुछ हुआ है और मैं बिना सुने आज यहाँ से नहीं जाने वाला हूँ|
सुजाता चाहती थी की अपना दिल खोलकर अभय के सामने रख दे, उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था| उसने कभी किसी से इस तरह की बात नहीं की थी|
‘वो तुम मुझे अच्छे लगते हो,’ उसने धीरे से कहा|
अभय कुछ पलों के लिए तो खामोश रहा और फिर ज़ोर से हँस पड़ा|
‘बस इतनी सी बात| मुझे लगा ही था| तुम भी ना एकदम बेवकूफ़ हो| पहले क्यों नहीं बताया| और मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ|’
अभय को इस तरह हँसता हुआ देखकर सुजाता को हैरानी हो रही थी| तो क्या वह भी उसे पसंद करता है?
‘मुझे लगा कहीं तुम मुझ से गुस्सा न हो जाओ|’
‘तुम्हें लगता है की मैं इस बात पर तुमसे गुस्सा हो जाऊँगा|’
‘पता नहीं?’ सुजाता ने अपना सिर झुका लिया|
‘तुम अगर पहले बता देती तो हम इस बात का कोई ना कोई हल ख़ोज लेते| तुम्हें बेकार ही इतनी तकलीफ़ से नहीं गुजरना पड़ता|’
अभय की बात सुनकर सुजाता को थोड़ी राहत महसूस हुई| उसका दिल भी अब शांत हो गया था|
‘देखो तुम्हारे साथ शायद ऐसा पहली बार हुआ है इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है लेकिन जब कुछ वक्त बीत जायेगा तो तुम्हें इस बात पर हंसी आयेगी की तुमने कितनी बेवकूफी की| हमें कई बार ऐसे लोग मिलते हैं जिन्हें हम बहुत पसंद करने लगते हैं| हमें लगता है हम उनके बिना जी नहीं सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है| तुम देखना कुछ समय बाद तुम यह सब भूल जाओगी|’
‘लेकिन....|’
‘मुझे लगा था तुम बहुत अक्लमंद हो| लेकिन तुम भी उन बेवकूफ़ लड़कियों की तरह निकली|’
‘मतलब?’
‘अरे भई, यह प्यार-व्यार के चक्कर में पड़ना हम जैसे लोगों का काम होता है जिन्हें कुछ और नहीं आता है| और तुम्हें सच कहूँ यह प्यार –व्यार कुछ नहीं होता है बस कुछ देर का आकर्षण होता है| कभी यह जल्दी ख़त्म हो जाता है और कभी देर तक चलता है| लेकिन एक दिन ख़त्म ज़रूर होता है| अब मुझे ही देख लो मुझे पता नहीं आज तक कितनी लड़कियों से प्यार हुआ| लेकिन सब का एक ही अंजाम हुआ, ब्रेक-अप|’
‘लेकिन मैं सच में तुमसे तुमसे प्यार करती हूँ|’
‘हाँ, हाँ मुझे पता है| लेकिन तुम्हारे साथ ऐसा पहली बार हुआ हैं ना इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है| पता है तुम मुझे क्यों अच्छी लगती थी और मैं क्यों तुम्हारे साथ इतना वक्त बिताता था?’
‘क्यों?”
‘क्योंकि मुझे पता था की तुम उन बाकि सब लड़कियों की तरह मुझ से प्यार नहीं कर बैठोगी और मेरे पीछे नहीं पड़ी रहोगी की मैं तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड बना लूँ| मैं उन सब से इतना परेशान हो चुका था| मैं तुम्हें समझदार समझता था लेकिन तुम भी बाकियों की तरह ही निकली| देखो तुम्हें अपना अपना भविष्य के बारे में सोचना चाहिए ना की मेरे बारे में| तुम्हें और भी कई अच्छे लड़के मिल जायेंगे|’
सुजाता एकटक अभय की बातों को सुन रही थी| उसके आंसू अब रुक चुके थे और चेहरा कठोर होने लगा था| अभय को ऐसा क्यों लगा की वह उसके प्यार में नहीं पड़ेगी? क्योंकि वह उससे कम सुन्दर है इसलिए? या फिर जिन लड़कियों के पास दिमाग होता है उनके पास दिल नहीं होता? क्यों वह एक सुन्दर लड़के के प्यार में नहीं पड़ सकती? क्या वह प्यार करना नहीं जानती? क्या प्यार करने का हक़ सिर्फ अभय जैसे लड़कों और उन सुन्दर लड़कियों को होता है जिनके साथ वह घूमता है? क्या उसके पास दिल नहीं है? क्या उसकी कोई भावनाएँ नहीं? और क्या उसका दिल टूटना नहीं जानता? उसका दिल भी चाहता है की कोई उसे भी प्यार करने वाला हो, उसे बाँहों में भरने वाला हो, उसका ख्याल रखने वाला हो, उसे हंसाने वाला हो? क्या वह अभय को उन लड़कियों से कम प्यार करती क्योंकि वह खुबसूरत नहीं है और उनकी तरह बनठन कर नहीं रहती है? क्या प्यार करने के लिए सिर्फ सुन्दर चेहरे और शरीर की ही जरुरत होती है? क्या मन की भावनाओं का इससे कोई लेना देना नहीं है?
उसे समझ आ रहा था की अभय जैसा लड़का उसे कभी पसंद कर ही नहीं सकता है| शायद उसके साथ होने और उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनाने में उसे शर्मिंदगी महसूस होगी| उसे कोई अपने जैसी ही पसंद आयेगी जो उसके जितनी ही गोरी हो, और उस जितनी ही सुन्दर हो| और सिर्फ अभय ही नहीं बल्कि और लोग भी उसके जैसी लड़की को अभय के साथ देखकर पहला सवाल यही करेंगे - क्या इसे कोई और नहीं मिली? हमारे समाज में शादी के वक्त लड़की का सिर्फ एक गुण होता है और वह है उसकी सुन्दरता| अगर लड़की सुन्दर नहीं है तो उसके दुसरें गुणों का कोई मोल नहीं है|
और आज अभय को शायद और ज्यादा घमंड हो गया होगा की देखो सुजाता जैसी अक्लमंद लडकियाँ भी उसके पीछे दीवानी हुई फिरती है| अभय की बातों में उसका यह घमंड साफ झलक रहा था|
सुजाता चुपचाप उसे सुनती रही| और एक घंटे बाद वह वापिस घर लौट आयी| शायद अभय को वह जैसा समझ रही थी वह वैसा नहीं था| अगर वह साफ मना कर देता यह कहकर की उसे उससे प्यार नहीं है तो भी सुजाता को इतना बुरा नहीं लगता जितना उसे उसकी ऐसी बातें सुनकर लग रहा था| वह अभय को जितना संवेदनशील और अक्लमंद समझती थी आज उसे उसकी सोच उतनी ही असंवेदनशील और घटिया लग रही थी| उसे अपने दिल के टूट जाने का इतना दुःख नहीं था जितना दुःख उसे इस बात का हो रहा था की अभय के लिए उसकी भावनाओं का कोई मतलब नहीं है| एक दोस्त की खातिर ही सही वह वह उसका दर्द थोड़ा कम कर सकता था लेकिन उसे तो इस बात में आनंद आ रहा था की उसके पीछे भागने वाली लडकियों में सुजाता का भी नाम जुड़ गया था| और उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब उसे पता चला वह किस से शादी कर रहा था| उसने अभय के बारे में जैसा सोचा था वह वैसा ही निकला| यही उनकी आखिरी बातचीत भी थी|
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